सपा में महेंद्र यादव की दोबारा वापसी के बाद फिर बड़ा फैसला, जिला महासचिव पद से हटाया
विरोध और बगावत के आरोपों के बीच बदले सियासी समीकरण, राधेश्याम जायसवाल की चिट्ठी के बाद पार्टी ने लिया निर्णय
सपा में महेंद्र यादव की दोबारा वापसी के बाद फिर बड़ा फैसला, जिला महासचिव पद से हटाया
विरोध और बगावत के आरोपों के बीच बदले सियासी समीकरण, राधेश्याम जायसवाल की चिट्ठी के बाद पार्टी ने लिया निर्णय
दीपेन्द्र भदौरिया ब्यूरो चीफ
सीतापुर। समाजवादी पार्टी ने महेंद्र यादव को पार्टी के जिला महासचिव पद से कार्यमुक्त कर दिया है। हाल ही में जिला अध्यक्ष बने शमीम कौसर सिद्दीकी ने ही महेंद्र यादव को संगठन में अहम जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन नियुक्ति के बाद पार्टी के भीतर उठे सवालों और पूर्व विधायक राधेश्याम जायसवाल की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भेजे गए पत्र के बाद सियासी समीकरण तेजी से बदल गए। पार्टी के इस फैसले को संगठन के भीतर चल रही खींचतान पर तत्काल ब्रेक लगाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, महेंद्र यादव के सपा में दोबारा आने और संगठन में जिम्मेदारी मिलने के बाद पार्टी के भीतर ही उनके पुराने राजनीतिक रुख को लेकर सवाल उठने लगे थे। पूर्व विधायक राधेश्याम जायसवाल ने पार्टी मुखिया को भेजे पत्र में आरोप लगाया था कि पूर्व के चुनावों में महेंद्र यादव ने सपा के अधिकृत प्रत्याशियों का विरोध किया था। पत्र में चुनाव के दौरान उनके कथित राजनीतिक रुख और गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया था। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और गरमा गया।
बताया जाता है कि नगर पालिका और विधानसभा चुनाव के दौरान सीतापुर सदर सीट पर सपा प्रत्याशियों के विरोध को लेकर महेंद्र यादव का नाम पार्टी के भीतर चर्चा में रहा था। आरोप यह भी लगाया गया कि नगर पालिका चुनाव में उन्होंने सपा के बागी प्रत्याशी के समर्थन में सार्वजनिक मंच साझा किया और पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि इन आरोपों पर महेंद्र यादव का पक्ष सामने आना बाकी है।
कांग्रेस से सपा तक और फिर संगठन से बाहर
महेंद्र यादव पहले समाजवादी पार्टी में सक्रिय रहे थे। बाद में कांग्रेस सांसद राकेश राठौर के साथ राजनीतिक रूप से जुड़ गए और कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाई। हाल तक उन्हें सांसद का प्रतिनिधि भी बताया जाता रहा। इसके बाद सपा के सीतापुर संगठन की कमान शमीम कौसर सिद्दीकी के हाथों में आने पर महेंद्र यादव ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर दोबारा सपा का दामन थामा।
सपा में वापसी के साथ ही उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल गई। यही नियुक्ति अब पार्टी के लिए राजनीतिक उलझन बन गई। विरोध के स्वर तेज होने के बाद पार्टी नेतृत्व ने महेंद्र यादव को पद से हटाकर पूरे घटनाक्रम पर विराम लगाने का फैसला किया।
फैसले में दिखा राधेश्याम का बढ़ता असर?
पार्टी के इस फैसले को पूर्व विधायक राधेश्याम जायसवाल के संगठन में बढ़ते प्रभाव और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सपा अभी से अपने संगठन और संभावित दावेदारों के बीच समीकरण साध रही है।
महेंद्र यादव को हटाए जाने के बाद अब जिला महासचिव पद के लिए नए नामों की चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी सूत्रों के हवाले से सेउता क्षेत्र के वरिष्ठ सपा नेता शिव कुमार यादव और हरगांव क्षेत्र के लाल सिंह यादव के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अभी नए महासचिव के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
फिलहाल महेंद्र यादव की सपा में वापसी जितनी तेजी से हुई थी, संगठन में उनका सफर उतनी ही तेजी से खत्म हो गया। सियासी संदेश साफ है—2027 की चुनावी बिसात से पहले सपा संगठन के भीतर पुराने विरोध और नए समीकरणों का हिसाब-किताब करने के मूड में नजर आ रही है।
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