श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद : सुलह का प्रयास बेनतीजा

अब दोनों पक्षों के बीच 18 अगस्त को फिर होगी वार्ता

Aug 08, 2026 - 22:41
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद : सुलह का प्रयास बेनतीजा

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद : सुलह का प्रयास बेनतीजा

-अब दोनों पक्षों के बीच 18 अगस्त को फिर होगी वार्ता

मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर दोनों पक्षों के बीच स्थानीय स्तर पर शुक्रवार को हुई वार्ता बेनतीजा रही। अधिवक्ताओं के अनुसार, दोनों पक्षों ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) की अदालत में अपनी-अपनी दलीलें रखीं हालांकि, किसी सहमति पर नहीं पहुंचा जा सका।अब दोनों पक्षों के बीच 18 अगस्त को फिर वार्ता होगी। अगर इस बार भी कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकलता है तो मामले में उच्चतम न्यायालय से ही निर्णय की उम्मीद होगी।  

करीब डेढ़ दर्जन वादकारियों ने खुद को भगवान श्रीकृष्ण का अनन्य भक्त बताते हुए दावा किया कि शाही ईदगाह श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के स्वामित्व वाली 13.37 एकड़ भूमि पर स्थित है। उन्होंने उक्त भूमि हिंदू पक्ष को वापस सौंपने का अनुरोध किया है। इन दावों से संबंधित कई मामले इलाहाबाद उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन हैं। अधिवक्ताओं ने बताया कि इन मामलों को सुलह के माध्यम से हल करने के लिए उच्चतम न्यायालय ने दोनों पक्षों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जरिये आपसी वार्ता कर समाधान निकालने का निर्देश दिया था। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) की अदालत में चार जुलाई को हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष को उक्त भूमि से ईदगाह हटाकर किसी अन्य स्थान पर निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया था हालांकि, मुस्लिम पक्ष का कोई प्रतिनिधि वहां नहीं पहुंचा था। इसके बाद शुक्रवार को फिर वार्ता की तारीख तय की गई थी।  

हिंदू पक्ष के अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस बार भी उनकी ओर से मुस्लिम पक्ष को अन्यत्र भूमि उपलब्ध कराने और विवादित भूमि मंदिर न्यास को सौंपने का सुझाव दिया गया। वहीं, मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधि और शाही ईदगाह इंतजामिया कमेटी के सचिव अधिवक्ता तनवीर अहमद ने हिंदू पक्ष के प्रस्ताव को खारिज करते हुए वर्ष 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और इंतजामिया कमेटी के बीच हुए समझौते पर कायम रहने की बात कही। जब मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है तो अदालत को ही तथ्यों पर विचार कर यह तय करना चाहिए कि किस पक्ष का दावा सही है। उन्होंने कहा कि ऐसे में समझौता वार्ता की आवश्यकता नहीं है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) अरविंद कुमार ने अंतिम प्रयास के तौर पर एक अन्य विशेष लोक अदालत आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसके लिए दोनों पक्षों को 18 अगस्त को उपस्थित होकर मामले का समाधान निकालने का अवसर दिया गया है।

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