मरेली में बंदरों के आतंक पर प्रशासन सख्त, विशेषज्ञ टीम ने शुरू किया पकड़ने का अभियान
फसलों के नुकसान और ग्रामीणों पर हमलों से परेशान थे लोग, किसान मंच की पहल के बाद डीएम ने दिए निर्देश
मरेली में बंदरों के आतंक पर प्रशासन सख्त, विशेषज्ञ टीम ने शुरू किया पकड़ने का अभियान
फसलों के नुकसान और ग्रामीणों पर हमलों से परेशान थे लोग, किसान मंच की पहल के बाद डीएम ने दिए निर्देश
दीपेन्द्र भदौरिया, ब्यूरो चीफ
सीतापुर/मिश्रिख, गोंदलामऊ। मरेली गांव में लंबे समय से बंदरों के आतंक से परेशान ग्रामीणों और किसानों को अब राहत मिलने की उम्मीद जगी है। बंदरों के झुंड द्वारा फसलों को भारी नुकसान पहुंचाने के साथ ग्रामीणों पर हमले किए जाने की शिकायतों के बाद प्रशासन ने गंभीरता दिखाई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर डालमिया चीनी मिल, रामगढ़ की ओर से विशेषज्ञ टीम को मरेली गांव भेजा गया है। टीम गांव में डेरा डालकर बंदरों को पकड़ने का अभियान चला रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक, बंदरों के आतंक के कारण खेतों में खड़ी फसलों को लगातार नुकसान हो रहा था। बंदरों के झुंड के डर से ग्रामीणों में भी भय का माहौल बना हुआ था। कई बार बंदरों द्वारा लोगों पर हमला किए जाने की शिकायतें भी सामने आईं। समस्या बढ़ने के बाद किसानों ने प्रशासन से प्रभावी कार्रवाई की मांग की थी।
मामले को लेकर राष्ट्रीय किसान मंच के प्रदेश प्रभारी मोहित मिश्रा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर ग्रामीणों की समस्या से अवगत कराया था। प्रतिनिधिमंडल ने बंदरों से बर्बाद हो रही फसलों और ग्रामीणों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए जल्द से जल्द बंदर पकड़वाने की मांग की थी।
इस संबंध में तीन अगस्त 2026 को प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी वन प्रभाग, सीतापुर की ओर से उप कृषि निदेशक को भेजे गए पत्र में शासन की अंतरिम कार्ययोजना का भी उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार मानव-बंदर संघर्ष वाले प्रभावित क्षेत्रों में बंदरों को पकड़वाने की कार्रवाई संबंधित शहरी निकाय, नगर निकाय, नगर निगम अथवा ग्राम पंचायत के स्तर से की जानी है।
शासन की कार्ययोजना में रीसस मकाक बंदरों के संबंध में भी व्यवस्था स्पष्ट की गई है। वहीं, जिलाधिकारी के निर्देश के बाद विशेषज्ञ टीम के गांव पहुंचकर अभियान शुरू करने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। किसान संगठन और ग्रामीणों ने कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी तथा डालमिया चीनी मिल प्रबंधन के प्रति आभार जताया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि अभियान से उन्हें बंदरों के आतंक से स्थायी राहत मिलेगी।
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