सीतापुर कांग्रेस में नए ‘उदय’ की तैयारी, 11 दिन की पड़ताल के बाद जिलाध्यक्ष पर बड़ा फैसला
सीतापुर कांग्रेस में नए ‘उदय’ की तैयारी, 11 दिन की पड़ताल के बाद जिलाध्यक्ष पर बड़ा फैसला
सीतापुर कांग्रेस में नए ‘उदय’ की तैयारी, 11 दिन की पड़ताल के बाद जिलाध्यक्ष पर बड़ा फैसला
दीपेंद्र भदौरिया, ब्यूरो चीफ
सीतापुर। लंबे समय से संगठनात्मक सुस्ती और अंदरूनी खींचतान से जूझ रही कांग्रेस अब जिले में नए सिरे से संगठन को मजबूत करने की कवायद में जुटी है। संगठन पर्यवेक्षक अनन्त दहिया ने करीब 11 दिनों तक सीतापुर में प्रवास कर विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं और नेताओं से संवाद किया। अब उनके फीडबैक के आधार पर नए जिलाध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
पर्यवेक्षक ने गांव से लेकर शहर तक पार्टी की जमीनी स्थिति की जानकारी ली। संगठन में निष्क्रियता, गुटबाजी, पुराने और नए नेताओं के बीच तालमेल तथा स्थानीय स्तर पर नेतृत्व को लेकर कार्यकर्ताओं की राय जानी गई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बार जिलाध्यक्ष के चयन में केवल संगठनात्मक अनुभव ही नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरण और जनता के बीच पकड़ को भी प्रमुख आधार बनाया जा सकता है।
दलित-OBC और महिला चेहरे पर नजर
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस दलित या ओबीसी वर्ग से आने वाले किसी मजबूत चेहरे पर दांव लगाने की रणनीति पर विचार कर रही है। महिलाओं के बीच अच्छी पकड़ और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय चेहरे को भी प्राथमिकता मिल सकती है। पार्टी ऐसे नेता की तलाश में है, जो गुटों से ऊपर उठकर संगठन को एकजुट कर सके और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा पैदा कर सके।
मीडिया और प्रबुद्ध वर्ग से भी बातचीत
अनन्त दहिया ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के अलावा मीडिया से जुड़े लोगों, अधिवक्ताओं, समाजसेवियों और प्रबुद्ध वर्ग से भी बातचीत कर जिले के राजनीतिक हालात का फीडबैक लिया। संभावित दावेदारों की जनस्वीकार्यता, सक्रियता और संगठन क्षमता को लेकर भी राय जुटाई गई।
रिपोर्ट पर टिकी नजर
अब पर्यवेक्षक अपने 11 दिनों के प्रवास की रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व के सामने रखेंगे। इसमें संगठन की मौजूदा स्थिति और संभावित नेतृत्व को लेकर फीडबैक शामिल होने की संभावना है। कांग्रेस के लिए नया जिलाध्यक्ष चुनना महज नियुक्ति नहीं, बल्कि संगठन को गुटबाजी से बाहर निकालकर नई धार देने की चुनौती भी है। अब देखना होगा कि पार्टी सीतापुर में किस चेहरे पर दांव लगाती है और क्या नया नेतृत्व कांग्रेस के लिए सियासी ‘उदय’ की शुरुआत कर पाता है।
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