सीतापुर में शिक्षा सुधार की नई पहल, शैक्षिक नेतृत्व कार्यशाला में अधिकारियों को दिए सुशासन के मंत्र

बेसिक शिक्षा विभाग, सीतापुर की ओर से स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट (एसआईआरडी), लखनऊ में सुशासन एवं शैक्षिक नेतृत्व कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य खंड शिक्षा अधिकारियों एवं शैक्षणिक मेंटर्स को आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए साझा शैक्षणिक दृष्टि, रणनीति और नेतृत्व कौशल से सशक्त बनाना रहा।

Aug 07, 2026 - 17:26
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सीतापुर में शिक्षा सुधार की नई पहल, शैक्षिक नेतृत्व कार्यशाला में अधिकारियों को दिए सुशासन के मंत्र

दीपेन्द्र भदौरिया ब्यूरो चीफ 
सीतापुर। बेसिक शिक्षा विभाग, सीतापुर की ओर से स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट (एसआईआरडी), लखनऊ में सुशासन एवं शैक्षिक नेतृत्व कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य खंड शिक्षा अधिकारियों एवं शैक्षणिक मेंटर्स को आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए साझा शैक्षणिक दृष्टि, रणनीति और नेतृत्व कौशल से सशक्त बनाना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीक्षा जोशी एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा उपस्थित रहे। कार्यशाला का आयोजन भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) लखनऊ तथा सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन के सहयोग से किया गया। इसे जनपद सीतापुर की एक अभिनव पहल बताया गया, जिसमें प्रशासनिक नेतृत्व के साथ शैक्षणिक नेतृत्व को भी समान महत्व दिया गया।

अपने संबोधन में अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का वास्तविक उद्देश्य बच्चों की सीखने की क्षमता को बेहतर बनाना है। उन्होंने कक्षा स्तर से पीछे चल रहे विद्यार्थियों के लिए कैच-अप शिक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा निपुण भारत मिशन के अगले चरण की तैयारी के लिए परिणामोन्मुख प्रयास करने का आह्वान किया।

मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीक्षा जोशी ने सकारात्मक कार्य संस्कृति विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि ब्लॉक स्तर पर पीयर लर्निंग समूह बनाए जाएं, ताकि उत्कृष्ट कार्यों और नवाचारों को साझा कर एक-दूसरे से सीखने की संस्कृति विकसित हो और शैक्षणिक सुधार को गति मिले।

कार्यशाला में जनपद एवं ब्लॉक स्तर की शैक्षणिक प्राथमिकताओं, रणनीतियों तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक मॉनिटरिंग एवं सहयोग तंत्र पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही खंड शिक्षा अधिकारियों की भूमिका को केवल प्रशासनिक निरीक्षण तक सीमित न रखकर विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण एवं अधिगम सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।

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