लाखों की लागत से बने बाबा महादेवदास अमृत सरोवर में उगी भांग
इंटरलॉकिंग पर उगी झाड़ियां, बरसात में भी खाली पड़ा सरोवर
लाखों की लागत से बने बाबा महादेवदास अमृत सरोवर में उगी भांग
इंटरलॉकिंग पर उगी झाड़ियां, बरसात में भी खाली पड़ा सरोवर
बीडीओ बोले-ग्राम सचिव को निर्देश जारी
दीपेन्द्र भदौरिया ब्यूरो चीफ
सीतापुर (मछरेहटा)। शासन की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायत उमरापुर में लाखों रुपये की भारी-भरकम लागत से निर्मित बाबा महादेव दास अमृत सरोवर आज अपनी बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा की जीती-जागती तस्वीर बना हुआ है। जिम्मेदारों की घोर अनदेखी और देखरेख के अभाव में पूरा सरोवर परिसर भांग, गांजा और कटीली झाड़ियों के जंगल में तब्दील हो चुका है, जिससे इसका मूल उद्देश्य ही दम तोड़ता नजर आ रहा है।
सरोवर के सुंदरीकरण और पर्यावरण संरक्षण के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। तटबंधों पर पौधारोपण कराने के बजाय परिसर में जगह-जगह जंगली वनस्पतियां उग आई हैं। सरोवर के चारों ओर लाखों खर्च कर बनाई गई इंटरलॉकिंग पाथवे पूरी तरह घास-फूस से ढक चुकी है, जिससे यह किसी विकसित जलाशय के बजाय कोई उजाड़ बियाबान नजर आता है। हैरत की बात तो यह है कि मानसून और भीषण बरसात के इस मौसम में भी सरोवर पानी की एक-एक बूंद को तरस रहा है और नाममात्र का जल ही जमा हो सका है। इतना ही नहीं, देखरेख न होने से किनारों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं, जो किसी बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी सफाई और सुंदरीकरण पर ध्यान नहीं दिया गया तो सरकारी धन की यह बर्बादी पूरी तरह बेकार साबित होगी।
इस पूरे मामले पर खंड विकास अधिकारी मछरेहटा अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। संबंधित ग्राम पंचायत सचिव को सख्त निर्देश जारी कर अमृत सरोवर की तत्काल साफ-सफाई और आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने के आदेश दिए गए हैं।
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