यूपी पुलिस का अमानवीय चेहरा एक बार और आया सामने, चोरी का जुर्म कुबूलवाने के लिए युवक को दी गई थर्ड डिग्री व हॉफ एनकाउंटर की धमकी!
यूपी पुलिस का अमानवीय चेहरा एक बार और आया सामने, चोरी का जुर्म कुबूलवाने के लिए युवक को दी गई थर्ड डिग्री व हॉफ एनकाउंटर की धमकी!
यूपी पुलिस का अमानवीय चेहरा एक बार और आया सामने, चोरी का जुर्म कुबूलवाने के लिए युवक को दी गई थर्ड डिग्री व हॉफ एनकाउंटर की धमकी!
बाराबंकी। यूपी पुलिस की बर्बरता का एक और मामला प्रकाश में आया है जहां चोरी का जुर्म जबरन कबूल करवाने के लिए एक युवक की पुलिस कोतवाली के अंदर जमकर पिटाई की गई।
घटना जनपद बाराबंकी के बदोसराय कोतवाली की है जहां 11 सितम्बर को स्थानीय पुलिस द्वारा युवक हर्षित मिश्रा उर्फ शानू को उसके घर से एवं एक अन्य व्यक्ति शिव प्रकाश मिश्रा को बीच चौराहे से उठा लिया गया तथा पीछे के रास्ते से कोतवाली परिसर में एक कमरे में ले जाकर दोनों को जमकर पीटा गया।
बदोसराय थाना क्षेत्र के कस्बा निवासी हर्षित मिश्रा उर्फ शानू पुत्र गोपाल मिश्रा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं संबंधित उच्च पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि दिनांक 11 सितम्बर 2026 को पुलिसकर्मियों द्वारा उसे उसके घर से ले जाकर थाना परिसर के एक कमरे में बंद कर दिया गया तथा उसकी लात घूंसों डंडे एवं पट्टे से उसे पीटा गया।
प्रार्थना पत्र के अनुसार, 11 सितम्बर को दोपहर लगभग 11 बजे बदोसराय थाने के उपनिरीक्षक लक्ष्मीकान्त तिवारी एक सिपाही के साथ हर्षित मिश्रा के घर पहुंचे और उसे थाने ले गए। आरोप है कि थाने में उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया। कुछ समय बाद शिव प्रकाश पुत्र मुनुवा को लेकर पुलिसकर्मी वहां पहुंचे। प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि उपनिरीक्षक लक्ष्मीकान्त तिवारी, सिपाही आशीष सिंह तथा एक अन्य अज्ञात सिपाही द्वारा उसे बेहरमी से पीटा गया एवं चोरी का जुर्म कबूलवाने का जबरन दबाव बनाया गया।
शिकायतकर्ता के सामने ही शिवप्रकाश की भी पिटाई उक्त पुलिसकर्मियों द्वारा की गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसके साथ लात-घूंसों एवं डंडे से मारपीट, गाली-गलौज तथा जान से मारने की धमकी दी गई। आरोप के मुताबिक उससे उसके चाचा मंजुल मिश्रा के घर हुई कथित चोरी को स्वीकार करने के लिए दबाव बनाया गया और कहा गया कि जब तक वह चोरी स्वीकार नहीं करेगा, तब तक उसे बंद रखा जाएगा।
घटना की जानकारी मिलने पर शिकायतकर्ता के पिता गोपाल मिश्रा थाने पहुंचे और मारपीट का विरोध किया। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक बाराबंकी के सीयूजी नंबर पर दोपहर लगभग 12:39 बजे फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, पुलिस अधीक्षक कार्यालय से थाना प्रभारी को फोन आने के बाद उसे छोड़ा गया और वह लगभग दोपहर 3 बजे अपने घर वापस पहुंचा। प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया है कि थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों में उसके थाने लाए जाने और छोड़े जाने की पूरी घटना के महत्वपूर्ण साक्ष्य उपलब्ध हो सकते हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे थाने से छोड़ने से पहले तथा बाद में उसे धमकाया गया कि यदि उसने उसके साथ हुई मारपीट की सूचना कहीं दी तो उसके विरुद्ध फर्जी मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया जाएगा अथवा हॉफ एनकाउंटर कर दिया जाएगा।
प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि घटना के बाद शिकायतकर्ता काफी भयभीत एवं आहत है तथा उसने 12 सितम्बर 2026 को जिला अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण कराया है।
इस संबंध में शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री एवं संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने, थाने के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराकर उसकी जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच निष्पक्ष एजेंसी/वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए, चिकित्सकीय रिपोर्ट एवं सीसीटीवी फुटेज को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखा जाए तथा जांच पूरी होने तक संबंधित पुलिसकर्मियों द्वारा शिकायतकर्ता को प्रभावित या धमकाने की किसी भी संभावना को रोका जाए।
अब देखना यह है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस मामले को संज्ञान में लेकर दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध क्या कार्यवाही करते हैं ?
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)