जज का नाबालिग बेटा 200kmph स्पीड से मर्सिडीज चलाता था:रील्स डिलीट कीं; केरलम में इंजीनियर की मौत पर कहा था- पहली बार कार चलाई

Oct 26, 2026 - 14:22
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जज का नाबालिग बेटा 200kmph स्पीड से मर्सिडीज चलाता था:रील्स डिलीट कीं; केरलम में इंजीनियर की मौत पर कहा था- पहली बार कार चलाई
केरलम के कोच्चि में जज के नाबालिग बेटे की मर्सिडीज की टक्कर से इंजीनियर की मौत के मामले में नए खुलासे हुए हैं। नाबालिग ने पुलिस से कहा था कि उसने पहली बार कार चलाई और यूट्यूब से ड्राइविंग सीखी। हालांकि, NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी का इंस्टाग्राम अकाउंट था, जिस पर 2,500 से ज्यादा फॉलोअर्स थे। वह अक्सर तेज स्पीड में कार चलाने की रील्स पोस्ट करता था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कुछ वीडियो में मर्सिडीज को 200 kmph तक की रफ्तार से चलाते देखा गया था। हादसे के कुछ घंटों बाद अकाउंट से पोस्ट डिलीट कर दी गईं और उसे प्राइवेट कर दिया गया। मृतक की रिश्तेदार जयलक्ष्मी थंकराज का आरोप है कि हादसे से करीब 10 मिनट पहले भी आरोपी ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया था। उन्हें घटनास्थल से भी पता चला कि कार तेज रफ्तार में थी। परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल जयलक्ष्मी थंकराज ने कहा कि पुलिस मामले में उचित कार्रवाई नहीं कर रही है। परिवार हादसे और आरोपी को पुलिस स्टेशन लाए जाने के समय का पता लगा रहा है। उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि दोनों समय की जांच की जा रही है। जयलक्ष्मी के मुताबिक, पहली FIR में आरोपी का नाम शामिल नहीं था। पुलिस ने कहा था कि उसका नाम दूसरी FIR में जोड़ा जाएगा। परिवार ने अधिकारियों से मांग की है कि आरोपी के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का आरोप लगाया जाए और गंभीर धाराएं लगाई जाएं। परिवार का दावा- कार में तीन और लोग थे मृतक के परिवार ने आरोप लगाया कि हादसे के वक्त कार में नाबालिग के अलावा तीन अन्य लोग भी मौजूद थे। परिवार के मुताबिक, टक्कर के बाद वे मौके से भाग गए। परिवार ने मामले में लीपापोती और सबूत मिटाने के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। परिवार ने आरोपी के पिता यानी जज के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने इस संबंध में कानूनी राय मांगी है। पहले थाने से जमानत, फिर दोबारा हिरासत में लिया पुलिस ने शुरुआत में नाबालिग के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत केस दर्ज किया था और उसे थाने से जमानत दे दी थी। विरोध के बाद पुलिस ने धारा 105 भी जोड़ दी। इसके बाद नाबालिग को दोबारा हिरासत में लेकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया। बोर्ड ने उसे जमानत दे दी।

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