पढ़ाई-खर्च के लिए छात्र अपना खून बेच रहे:यूपी में नीट का छात्र बोला- खून तो बनता रहेगा; पढ़ाई का मौका फिर नहीं मिलेगा

Oct 26, 2026 - 10:59
Updated: 2 hours ago
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पढ़ाई-खर्च के लिए छात्र अपना खून बेच रहे:यूपी में नीट का छात्र बोला- खून तो बनता रहेगा; पढ़ाई का मौका फिर नहीं मिलेगा

पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए छात्रों को अपना खून बेचना पड़ रहा है। गरीब परिवारों के इन बच्चों को नीट-एसएससी की महंगी कोचिंग, हॉस्टल-मेस की फीस भरनी होती है। पैसे जुटाने के लिए कोई छात्र महीने में 2 बार, तो कोई 4 बार अपना खून निकालकर बेचने को मजबूर है। दैनिक भास्कर के हिडन कैमरे पर ऐसे छात्रों ने अपनी बेबसी सुनाई- पापा किसान हैं, लेकिन इतनी जमीन नहीं कि खेती-बाड़ी से घर के सारे खर्च उठा सकें। इसलिए हम पढ़ाई का खर्च खुद ही मैनेज करते हैं। खून बेचकर जो पैसा मिलता है, उसे कई बार हम गांव भी भेजते हैं। यूपी के कई शहरों में पढ़ाई के लिए छात्र तंगी से निपटने के लिए खून बेचने लगे हैं। इसका इनपुट मिलने पर हमने इन्वेस्टिगेट करने के लिए प्रयागराज को चुना, क्योंकि यहां हजारों छात्र नीट-एसएससी की तैयारी करते हैं। हमारे अंडरकवर रिपोर्टर मरीज के घरवाले बनकर स्टूडेंट्स तक पहुंचे। पढ़िए पूरी इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट… 2 महीने से हॉस्टल की फीस नहीं दी, क्या करते ब्लड बैंक आना पड़ा हमारे रिपोर्टर प्रयागराज के राजापुर चौराहे पर स्थित इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन (AMA) ब्लड बैंक पहुंचे। यह शहर का सबसे बड़ा ब्लड बैंक है। बाहर कुछ छात्र दिखे। उन्हें बताया कि हमें खून की जरूरत है। इस डील के दौरान छात्र बोला- प्रयागराज में रहकर SSC की तैयारी कर रहा हूं। घर का इकलौता बेटा हूं। पापा किसान हैं, मां की मौत हो चुकी है। दो छोटी बहनें हैं, जो गांव में रहकर पढ़ाई करती हैं और घर संभालती हैं। खेतीबाड़ी से सिर्फ दाल-रोटी भर चल पाती है। खून इसलिए बेचना पड़ रहा है, क्योंकि 2 महीने से हॉस्टल की फीस नहीं दे पाया था। अगर रहने का ठिकाना चला गया, तो पढ़ाई कैसे होगी? यही सोचकर ब्लड बैंक तक चला आया। रिपोर्टर - ब्लड की 3 यूनिट चाहिए…डोनर नहीं मिल रहे हैं? स्टूडेंट - मुझे पैसे की जरूरत है, मैं दे कर सकता हूं…। रिपोर्टर - कितना पैसा लगेगा? स्टूडेंट - 8 हजार रुपए दे दीजिए…आपके लिए खून दे दूंगा। रिपोर्टर - पढ़ाई करते हो, खून बेचने की जरूरत क्यों पड़ गई? स्टूडेंट - पापा किसान हैं, कोचिंग की फीस बहुत ज्यादा है…घर से जो पैसे मिलते हैं, उससे पूरा खर्च नहीं हो पाता। रिपोर्टर - कोचिंग, ट्यूशन पढ़ा लेते, खून क्यों बेच रहे हो? स्टूडेंट - खून तो फिर बन जाएगा, लेकिन पढ़ाई नहीं हुई तो बेरोजगार रह जाऊंगा। रिपोर्टर - खून से कितना खर्च निकल पाएगा, इसमें दिक्कत नहीं होती? स्टूडेंट - कुछ दिन तक होती है… लेकिन खर्च निकालना ज्यादा जरूरी है, नहीं तो गांव जाना पड़ेगा। पापा बीमार हैं, घर रुपए भेजने पड़ते हैं… इन्वेस्टिगेशन के दौरान SSC की तैयारी करने वाले दूसरे छात्र आनंद से मुलाकात हुई। वो कोचिंग की फीस चुकाने के लिए ब्लड बैंक पहुंचा। 10 दिन पहले भी मेस के पैसे देने के लिए खून बेच चुका है, लेकिन तब वह दूसरे ब्लड बैंक गया था। आनंद कहता है कि कल अगर अफसर बन सका, तो सारी परेशानियां ही दूर हो जाएंगी। इसीलिए अभी जूझ रहे हैं। रिपोर्टर - आप ब्लड देने आए हैं…? स्टूडेंट - हां…लेकिन 10 दिन पहले दे चुका हूं, दूसरे ब्लड बैंक में…। चलिए, यहां दे दूंगा। रिपोर्टर - कितना पैसा देना होगा? स्टूडेंट - 8 हजार रुपए देने होंगे, इससे कम में नहीं दे सकेंगे…। रिपोर्टर - आप पढ़ाई करते हैं, क्यों खून बेच रहे? स्टूडेंट - जरूरत है….पहले कोचिंग की फीस के लिए बेचा था, अब मेस का पैसा देना है….। रिपोर्टर - 10 दिन में दो बार कैसे दोगे, दिक्कत हो गई तो…? स्टूडेंट - नहीं कोई दिक्कत नहीं होगी, पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए तो कर रहा हूं। रिपोर्टर - ब्लड बैंक वाला पकड़ता नहीं? स्टूडेंट - पहले ब्लड देकर स्लिप ले लेते हैं। इसके बाद मरीज का डिमांड लेटर ले जाकर खून ले लेते हैं। कुछ तो करना पड़ेगा। नीट छात्र बोला- मुझे प्रयागराज भेजने में पापा कर्ज में आ गए… ब्लड बैंक के बाहर नीट की तैयारी करने वाले एक और छात्र से हमारी मुलाकात हुई। इनका नाम विवेक था। वह कहता है- कोई खुशी से खून नहीं बेचता है। पापा को बहुत उम्मीदें हैं, मुझे प्रयागराज भेजकर पढ़ाने के लिए 2 बीघा खेत गिरवी रख दिया। वो खुद कर्ज में आ गए, लेकिन मेरा एग्जाम क्लियर नहीं हुआ। अब मेरे पास आखिरी अटेम्प्ट बचा है। रिपोर्टर - आप खून देने आए हैं…? स्टूडेंट - हां…दिवाली से पहले कोचिंग की फीस जमा करनी है। रिपोर्टर - घर से पैसा नहीं मिलता? स्टूडेंट - पापा किसान हैं, घर का खर्च ही नहीं निकाल पाते। खून देकर पैसे मिल जाएंगे तो फीस जमा हो जाएगी। रिपोर्टर - एजेंट के बुलाने पर यहां आए हैं? स्टूडेंट - हां, बुलाया था लेकिन वह पैसा काट लेता है। डायरेक्ट में पैसा ठीक मिल जाता है। रिपोर्टर - खून बेचने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है? स्टूडेंट - घर से मजबूत होते तो दिक्कत नहीं होती। लेकिन दिक्कत है, इसलिए जब इमरजेंसी आती है, तब ब्लड देते हैं। कई छात्र ऐसे ही रुपए का अरेंजमेंट करते हैं… हमें एक अन्य छात्र आशीष मिला। वह भी नीट की तैयारी कर रहा है। ब्लड बैंक में खून बेचने आया था। कैंपस से बाहर वो किसी मरीज का इंतजार करता हुआ मिला। उसने बताया कि बाहर से आकर पढ़ाई करने वाले कई छात्र इस तरह से रुपए का अरेंजमेंट करते हैं। बाहर से आकर प्रयागराज में पढ़ने वाले बच्चों को रहने-खाने पर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता है, लेकिन कोचिंग की फीस महंगी पड़ती है। अपने परिवार के बारे में कहते हैं- पापा ने जब भेजा था, तब उन्हें लगा कि मैं डॉक्टर बनकर लौटूंगा। अब छोटी-छोटी जरूरतें कैसे और कब तक उन्हें बताएंगे। इसलिए इस तरह से रुपए का अरेंजमेंट कर लेते हैं। रिपोर्टर - पहले भी खून दिया है कभी…? स्टूडेंट - हां… हम यहां पीडब्ल्यू में नीट की कोचिंग करते हैं। रिपोर्टर - ब्लड क्यों देते हो? स्टूडेंट - कोचिंग करते हैं, घर से मदद नहीं मिलती। इसलिए ऐसा करना पड़ता है। रिपोर्टर - पैसा ज्यादा बता रहे हो? स्टूडेंट - पैसा ज्यादा नहीं है, स्टूडेंट का ब्लड है, नशेड़ी सस्ता बेचता है। 4 छात्रों से बात करने के बाद 3 बातें साफ हो गईं- छात्रों की मजबूरी का फायदा उठा रहे दलाल इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि स्टूडेंट्स भले ही मजबूरी में खून बेच रहे हों, लेकिन एक बड़ा सिंडिकेट भी काम कर रहा है। ब्लड बैंक के आसपास एक्टिव दलाल के संपर्क में ऐसे स्टूडेंट्स होते हैं, जो एक कॉल पर खून देने के लिए आ जाते हैं। छात्रों ने बताया कि हॉस्टल के अलग-अलग ग्रुप होते हैं। इनमें कई छात्रों के पास एजेंट के कॉल भी आते हैं, जो मरीजों से डील करने के बाद ब्लड देने के लिए बुलाते हैं। भास्कर के अंडर कवर रिपोर्टर ने छात्र बनकर ऐसे ही एक दलाल सोनू से डील की। वो हमें प्रयागराज में इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन ब्लड बैंक के बाहर मिला। रिपोर्टर - सर, एक यूनिट ब्लड देना है, कितना मिलेगा? सोनू - 4 हजार रुपए दे देंगे…। रिपोर्टर - मेरे साथ पढ़ने वाले दोस्त कह रहे थे कि 8 हजार में देना। ये आप कम बोल रहे हैं? सोनू - सीधे ब्लड दिलाने में रिस्क है, पकड़े जा सकते हैं…। ब्लड बैंक वाले नजर रखते हैं। हम लोग ऐसे सेट करके रखते हैं, जिससे स्टूडेंट को कोई दिक्क्त नहीं होती। इसलिए जो रुपए आते हैं, उसमें हमारा भी कट होता है। रिपोर्टर - मैं पढ़ने वाला हूं…कोई नशेड़ी नहीं…। थोड़ा रेट बढ़ा दीजिए, आजकल ज्यादा परेशान हूं…। सोनू - पैसा नहीं बढ़ेगा, सबको इतना ही मिलता है। सारा रिस्क हमें कवर करना होता है। कई बार बोलने के बाद एजेंट 5 हजार देने को तैयार हुआ। लेकिन, प्रोसेसिंग फीस तब भी स्टूडेंट को देने के लिए कहा। फिर आगे बातचीत शुरू हुई- रिपोर्टर - 20 दिन पहले भी दिया था… कोई दिक्कत तो नहीं आएगी न…? सोनू - तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी…स्टूडेंट लोग इतना इंतजार कहां कर पाएगा। महीने में दो-दो बार देते हैं। पैसे की जरूरत है…तो करना ही पड़ेगा। रिपोर्टर - ये ब्लड बैंक वाला पहचान लेगा, तो पकड़कर क्या कुछ कार्रवाई करता है? सोनू - ब्लड बैंक बदल कर खून दिलाते हैं। इससे स्टूडेंट्स कभी पकड़ में नहीं आते। प्रयागराज में दिक्कत हुई तो आस-पास के जिलों से काम करा लिया जाता है। इस डील के दौरान सोनू और उसके साथी राजेश ने दावा किया- हम दोनों एक दिन में 12 यूनिट से ज्यादा ब्लड दिला देते हैं। हमारे पास हॉस्पिटल की मुहर, फर्जी डॉक्टर, पर्चा और डिमांड लेटर सब कुछ मिल जाएगा। ये तैयारी डोनर को सेफ साइड रखने के लिए रहती है। हम पहले से हॉस्पिटल का फर्जी डिमांड लेटर बनवाकर रखते हैं। पढ़ाई का खर्च, जिसके लिए छात्र खून बेच रहे छात्रों के अनुसार आकाश इंस्टीट्यूट, एलेन करियर, नारायणा जैसी कोचिंग सालभर की फीस एक साथ लेती हैं। ये करीब 1.20 लाख से 1.80 लाख रुपए तक होती है। हॉस्टल का कमरा 3500 से 5 हजार तक मिल पाता है। स्टडी मैटेरियल और खाने का खर्च भी उठाना होता है। सरकार अभ्युदय कोचिंग की सुविधा देती है, लेकिन इसमें एडमिशन के तय मानक है। ये सभी बच्चे पूरे नहीं कर पाते। खून बेचना अपराध, पकड़े जाने पर सजा-जुर्माना का प्रावधान भारत में खून बेचना या पैसे लेकर रक्तदान करना अपराध है। 1996 में सुप्रीम कोर्ट ने औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के नियमों के तहत देश में खून की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। सिर्फ स्वैच्छिक रक्तदान ही मान्य है। कितनी सजा और जुर्माना हो सकता है- बार-बार खून देना करना कितना नुकसानदायक है, ये समझिए प्रयागराज में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के सहायक आयुक्त ब्रजेश कुमार कहते हैं- मेडिकल साइंस में महिला-पुरुषों के लिए ब्लड डोनेट का स्टैंडर्ड तय है। सरकार की भी गाइडलाइन है, जिसे हर ब्लड बैंक को पालन करना होता है। डोनर अपनी जानकारी छिपाकर अगर ज्यादा बार ब्लड देते हैं, तो ये जानलेवा हो सकता है- ------------------------------- ये इन्वेस्टिगेशन भी पढ़ें - रेप-डकैती के आरोपी, पुलिस से बचने के लिए 'बाबा' बने, यूपी में तंत्र-मंत्र से बच्चा पैदा करने का दावा कर रहे झांसी का दिव्य दरबार…तंत्र-मंत्र के बीच दंडवत करते अनुयायी। ऊंचे तख्त पर ‘ज्ञान’ दे रहे बाबा के सामने अफसर और नेता भी मत्था टेक रहे हैं। 22 साल बाद पुलिस को पता चला ‘ज्ञान’ देने वाला यह बाबा लूट और किडनैपिंग का आरोपी है। 5 दिन पहले (11 अक्टूबर) झांसी से गिरफ्तार काली सरकार बाबा (असली नाम प्रदीप शुक्ला) की पोल खुलने के बाद दैनिक भास्कर ने इन्वेस्टिगेशन किया। इसमें पता चला यूपी में ऐसे कई अपराधी हैं, जो पुलिस से बचने के लिए बाबा बन गए। धर्म-आस्था के कारण पुलिस ऐसे बाबाओं पर हाथ नहीं डालती, जिसका इन्होंने फायदा उठाया। पढ़िए पूरी खबर...

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