यूपी में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का हाईकोर्ट का निर्देश, 27% आरक्षण लागू करने पर जोर
यूपी में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का हाईकोर्ट का निर्देश, 27% आरक्षण लागू करने पर जोर
यूपी में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का हाईकोर्ट का निर्देश, 27% आरक्षण लागू करने पर जोर
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायत चुनाव की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने और मौजूदा व्यवस्था के तहत चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने की। याचिका में मांग की गई थी कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल सामान्यतः पांच वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए और समय पर चुनाव कराना जरूरी है।
प्रशासक नियुक्ति को लेकर भी उठे सवाल
मामले में मौजूदा ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले को भी चुनौती दी गई थी। अदालत ने इस संबंध में दाखिल याचिकाओं पर विचार करते हुए स्पष्ट किया कि प्रशासकों की नियुक्ति से संबंधित शासनादेश को पूरी तरह अवैध नहीं माना जा सकता। हालांकि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाना आवश्यक होगा।
ओबीसी आरक्षण पर आयोग की भूमिका
पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण निर्धारित करने को लेकर भी सुनवाई के दौरान सवाल उठे। अदालत ने पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया पर असंतोष जताया था। न्यायालय ने कहा कि आरक्षण संबंधी प्रक्रिया और चुनाव की तैयारियां निर्धारित नियमों के अनुरूप पूरी की जानी चाहिए। आयोग का काम जारी रहने के बावजूद चुनाव प्रक्रिया बाधित नहीं होनी चाहिए।
सरकार के सामने क्या हैं विकल्प?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार के सामने कानूनी विकल्पों पर विचार करने की स्थिति है। सरकार आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल कर सकती है अथवा निर्धारित समयसीमा में चुनाव कराने की तैयारियां तेज कर सकती है। हालांकि किसी भी अपील या समयसीमा में बदलाव का निर्णय संबंधित अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा।
विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव की चुनौती
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पंचायत चुनाव कराना सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती माना जा रहा है। कम समय में मतदाता सूची, आरक्षण निर्धारण, चुनाव कार्यक्रम और सुरक्षा व्यवस्था जैसी तैयारियां पूरी करनी होंगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में आगे क्या कदम उठाते हैं।
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