सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन की मांग, 14 साल से संघर्षरत अनुदेशक शिक्षक
अनुदेशक शिक्षकों ने बकाया एरियर सहित शिक्षक समान वेतन और सुविधाएं देने की उठाई मांग
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन की मांग, 14 साल से संघर्षरत अनुदेशक शिक्षक
अनुदेशक शिक्षकों ने बकाया एरियर सहित शिक्षक समान वेतन और सुविधाएं देने की उठाई मांग
दीपेन्द्र भदौरिया ब्यूरो चीफ
**सीतापुर।** प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशक शिक्षकों ने अपने वेतन, सेवा संबंधी अधिकारों और लंबित मांगों को लेकर सरकार से न्याय की गुहार लगाई है। अनुदेशक शिक्षकों का आरोप है कि पिछले 14 वर्षों से उन्हें उनके विधिक एवं मौलिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। उनका कहना है कि इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से शासन-प्रशासन और न्यायालयों के समक्ष अपनी बात रखी जा रही है, लेकिन अब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं हो सका है।
अनुदेशक शिक्षकों ने दावा किया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 4 फरवरी 2026 को 46 पृष्ठों का निर्णय सुनाते हुए उनके वेतन और अन्य सुविधाओं से संबंधित राहत प्रदान की थी। उनका कहना है कि निर्णय में बकाया एरियर सहित शिक्षक समान वेतन एवं सुविधाएं देने के निर्देश दिए गए हैं। अनुदेशकों ने यह भी दावा किया कि सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बावजूद फैसले के अनुपालन के लिए अब तक शासनादेश जारी नहीं किया गया है।
अनुदेशक शिक्षकों का कहना है कि वे कई बार ज्ञापन देकर और संबंधित स्तरों पर पैरवी कर चुके हैं। इसके बावजूद उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से उनमें निराशा और असंतोष बढ़ रहा है।
शिक्षकों ने कहा कि वे राष्ट्र निर्माण और बच्चों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान और न्यायालय के आदेश का नियमानुसार अनुपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अपनी मांगों को जनसामान्य तक पहुंचाने के लिए उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सत्य एवं अहिंसा तथा बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संवैधानिक मार्ग पर चलकर संघर्ष जारी रखने की बात कही।
अनुदेशक शिक्षकों ने सरकार से मांग की है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करते हुए नियमानुसार आवश्यक शासनादेश जारी किया जाए तथा उन्हें देय वेतन, एरियर और अन्य सुविधाओं के संबंध में उचित कार्रवाई की जाए।
इस मौके पर अनुदेशक नीरज कुमार वर्मा, महेंद्र कुमार यादव, श्रवण कुमार, बबलू कुमार, मो. रिजवान, पंकज कुमार, अशोक कुमार मिश्रा, पुष्पेंद्र कुमार, राजविजयेंद्र कुमारी, रजनी, शिखा सिंह वर्मा, श्वेता वर्मा, मंजुल बाजपेयी, अरुणिमा, आशीष अवस्थी, आरती और प्राची मिश्रा।
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