पूरा सिस्टम दवा निर्माताओं की मदद क्यों कर रहा है:सुप्रीम कोर्ट बोला- MRP और रिटेलर को मिलने वाली कीमतों में अंतर, क्या इसे ऐसे ही चलने दें

Oct 27, 2026 - 16:28
Updated: 1 hour ago
0 0
पूरा सिस्टम दवा निर्माताओं की मदद क्यों कर रहा है:सुप्रीम कोर्ट बोला- MRP और रिटेलर को मिलने वाली कीमतों में अंतर, क्या इसे ऐसे ही चलने दें

सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) और रिटेलर को मिलने वाली कीमतों में भारी अंतर पर सरकार से सवाल किए। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने पूछा कि पूरा सिस्टम दवा निर्माताओं की मदद क्यों कर रहा है। कोर्ट ने नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) को निष्क्रिय बताते हुए सवाल किया कि दवाओं की कीमतों पर लगाम क्यों नहीं लगाई जा रही। सरकार ने दलील दी कि भारत में दवाओं की कीमतें दुनिया में सबसे कम हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि सरकार की नजरों के सामने यह सब हो रहा है और पूछा कि क्या इसे ऐसे ही बेलगाम चलने देना चाहिए। केंद्र ने कहा कि उसकी नीति पूरे दवा कारोबार को नियंत्रित नहीं करने की है। दोनों मामलों की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सुप्रीम कोर्ट में पिछली 2 सुनवाई 12 अक्टूबर: एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर भी सवाल इससे पहले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एंटी-कैंसर दवाओं का ट्रेड मार्जिन MRP के 30% तक सीमित करने पर केंद्र के जवाब को मुश्किल से कुछ खुश होने लायक बताया था। कोर्ट ने सवाल किया था कि सरकार दूसरी दवाओं के ट्रेड मार्जिन की सीमा तय क्यों नहीं कर सकती। अस्पतालों के कैंसर दवाओं पर भारी मुनाफा जोड़े जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आलोचना का सामना कर चुके केंद्र ने कहा था कि उसने एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन MRP के 30% तक सीमित करने का अहम फैसला लिया है। केंद्र के मुताबिक, इस फैसले से मरीजों को सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपए की बचत होने की उम्मीद है। 29 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट बोला- कैंसर दवाओं की ऊंची कीमत नरसंहार जैसी इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से सवाल किया था कि ₹2700 की कैंसर की दवा पर MRP ₹27,000 क्यों है। कोर्ट ने दवाओं की कीमतों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह नरसंहार है। कैसे तय होती है दवा की कीमत, 4 पॉइंट 1. ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) जरूरी दवाओं की कीमत कंट्रोल करता है। 2013 के DPCO तहत नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स (NLEM) में शामिल दवाओं की अधिकतम कीमत सरकार तय करती है। 2. बाजार में बिक रही दवाओं की कीमत के आधार पर जरूरी दवाओं की अधिकतम सीमा तय की जाती है। इससे ज्यादा कीमत पर दवा बेचना गैरकानूनी है। 3. स्वास्थ्य मंत्रालय दवाओं की सुरक्षा, असर और कीमत को देखते हुए जरूरी दवाओं की लिस्ट बनाता है। इसमें देश में आम बीमारियों और लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों का ध्यान रखा जाता है। 4. इस लिस्ट की समय-समय पर समीक्षा की जाती है और जरूरत के अनुसार नई दवाएं जोड़ी जाती हैं। जो दवाएं इस सूची में नहीं होतीं, उनकी कीमतों पर सरकार का सीधा नियंत्रण कम होता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User