खाद्यान्न घोटाले से सीतापुर का पुराना नाता, कभी 57 आरोपी तो अब ठेकेदार पर दो एफआईआर
2003-06 के चर्चित प्रकरण में पूर्व विधायक समेत 57 आरोपी, अब एमडीएम राशन मामले में ठेकेदार पर एफआईआर
खाद्यान्न घोटाले से सीतापुर का पुराना नाता, कभी 57 आरोपी तो अब ठेकेदार पर दो एफआईआर
2003-06 के चर्चित प्रकरण में पूर्व विधायक समेत 57 आरोपी, अब एमडीएम राशन मामले में ठेकेदार पर एफआईआर
दीपेन्द्र भदौरिया ब्यूरो चीफ
सीतापुर। सरकारी खाद्यान्न की हेराफेरी के मामलों से सीतापुर का पुराना नाता रहा है। वर्ष 2003 से 2006 के बीच सामने आए बहुचर्चित खाद्यान्न घोटाले ने प्रदेशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। करीब दो दशक बाद वर्ष 2026 में एमडीएम खाद्यान्न वितरण में सामने आई अनियमितताओं ने एक बार फिर जिले की राशन व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
2003-06 में सामने आया था बड़ा खाद्यान्न प्रकरण
वर्ष 2003 से 2006 के बीच सीतापुर समेत प्रदेश के कई जिलों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े सरकारी खाद्यान्न की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया था। आरोप था कि गरीबों और राशन दुकानों के लिए आवंटित अनाज को निर्धारित व्यवस्था के बजाय बाजार में बेचा गया। सीतापुर में जांच के बाद तत्कालीन अधिकारियों, गोदाम प्रभारियों, परिवहन ठेकेदारों, कोटेदारों और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे।
इस चर्चित प्रकरण में समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक ओमप्रकाश गुप्ता समेत कुल 57 लोगों को आरोपी बनाया गया था। बाद में जांच सीबीआई तक पहुंची और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई भी सामने आई। गिरफ्तारियों और संपत्ति संबंधी कानूनी कार्रवाई के चलते यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा।
अब एमडीएम खाद्यान्न वितरण पर सवाल
वर्ष 2026 में एमडीएम खाद्यान्न वितरण को लेकर सामने आए मामले में परसेंडी और बेहटा ब्लॉक में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जांच कराई गई। प्रशासन के अनुसार, गोदाम से खाद्यान्न उठान के बावजूद करीब 25 उचित दर विक्रेताओं तक राशन नहीं पहुंचने का मामला सामने आया। इसके बाद परिवहन ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की गई।
जिलाधिकारी के निर्देश पर मैसर्स बालाजी कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर रवि मिश्रा और उनकी भागीदार मंजू मिश्रा के खिलाफ रामकोट थाने में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 और बीएनएस की धारा 316(5) के तहत एफआईआर दर्ज की गई। फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई के साथ संबंधित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच चल रही है।
ठेकेदार ने अधिकारियों पर लगाए आरोप
इस बीच रवि मिश्रा ने वीडियो जारी कर खुद को पूरे मामले में फंसाए जाने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि उनकी ओर से करीब 1,000 से 1,500 कुंतल की कमी हुई थी, जिसे उन्होंने राशन खरीदकर पूरा किया, जबकि वास्तविक कमी करीब 5,000 कुंतल होने का दावा किया। उन्होंने अधिकारियों की संपत्ति की जांच की भी मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुराने घोटाले से लेकर मौजूदा एमडीएम प्रकरण तक सरकारी खाद्यान्न की आपूर्ति और निगरानी व्यवस्था सवालों के केंद्र में है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि अनियमितता के लिए वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है।
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