बद्रीनाथ धाम में भगवान बदरीविशाल को ओढ़ाया जाता है घृत कंबल, माणा की बेटियां निभाती हैं सदियों पुरानी परंपरा
बद्रीनाथ धाम में भगवान बदरीविशाल को ओढ़ाया जाता है घृत कंबल, माणा की बेटियां निभाती हैं सदियों पुरानी परंपरा
बद्रीनाथ धाम में भगवान बदरीविशाल को ओढ़ाया जाता है घृत कंबल, माणा की बेटियां निभाती हैं सदियों पुरानी परंपरा
शरद कुमार मिश्र
चमोली, उत्तराखंड। उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में भगवान बदरीविशाल को शीतकाल में घृत कंबल ओढ़ाने की अनूठी धार्मिक परंपरा श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई जाती है। इस परंपरा में सीमांत गांव माणा की महिलाओं और बेटियों का विशेष योगदान रहता है। यह परंपरा क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी हुई है।
व्रत रखकर एक ही दिन में तैयार किया जाता है कंबल
धार्मिक परंपरा के अनुसार, चमोली जिले के माणा गांव की महिलाएं और बेटियां व्रत रखकर ऊन से विशेष कंबल तैयार करती हैं। इस कंबल को घृत कंबल कहा जाता है। इसे तैयार करने की परंपरा में महिलाओं की सहभागिता को विशेष महत्व दिया जाता है।
कपाट बंद होने पर भगवान को ओढ़ाया जाता है घृत कंबल
बद्रीनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने के अवसर पर घृत कंबल को भगवान बदरीविशाल के विग्रह पर ओढ़ाया जाता है। परंपरा के अनुसार, कंबल पर शुद्ध घी और केसर का लेप लगाया जाता है। इसके बाद मंदिर के मुख्य पुजारी विधि-विधान के साथ भगवान को यह कंबल अर्पित करते हैं।
आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
बद्रीनाथ धाम की यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय महिलाओं की सहभागिता और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाती है। माणा गांव की महिलाओं और बेटियों द्वारा इस परंपरा को निभाना उत्तराखंड की लोक आस्था और धार्मिक संस्कृति की विशिष्ट पहचान है।
आर्य चेतना न्यूज | उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत पर विशेष रिपोर्ट
नोट: समाचार में परंपरा का सामान्य विवरण दिया गया है। वर्तमान वर्ष में कंबल मंदिर पहुंचने या अर्पित किए जाने की तिथि की अलग से पुष्टि की जानी चाहिए।
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