पश्चिम बंगाल SIR ट्रिब्यूनल से चौथे जज का इस्तीफा:मुर्शिदाबाद के वोटर्स अपीलों की सुनवाई प्रभावित, दोनों जजों के हटने से काम रुका
कोलकाता में रिटायर्ड कलकत्ता हाईकोर्ट जज विश्वजीत बसु ने पश्चिम बंगाल SIR ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने निजी कारणों का हवाला दिया है। बसु इस्तीफा देने वाले 19 रिटायर्ड जजों में चौथे हैं। जस्टिस बसु और रिटायर्ड जज इंद्रजीत चटर्जी मुर्शिदाबाद जिले के मामलों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। दोनों के एक महीने के भीतर हटने से वहां मतदाताओं की अपीलों का निपटारा लगभग रुक गया है। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस टीएस शिवगणनम, रिटायर्ड जज रंजीत कुमार बाग और इंद्रजीत चटर्जी इस्तीफा दे चुके हैं। न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि बसु ने शुक्रवार को लेटर के जरिए कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को अपने फैसले की जानकारी दी। बसु के इस्तीफ से मुर्शिदाबाद की अपीलों पर असर चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रिटायर्ड जजों के इस्तीफे से मुर्शिदाबाद में अपीलों के निपटारे पर असर पड़ सकता है। इस जिले से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। बसु के इस्तीफे से SIR ट्रिब्यूनल को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। उन्होंने कहा, “दोनों जज एक महीने के भीतर पद छोड़ चुके हैं। इससे मतदाताओं की अपीलों का निपटारा लगभग रुक गया है। इससे ट्रिब्यूनल की लंबित मामलों को निपटाने की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।” इससे पहले इस्तीफा देने वाले चटर्जी ने रोज करीब 22 किलोमीटर दूर आने-जाने में होने वाली परेशानी का हवाला देकर इस्तीफा दिया था। बाग और शिवगननम ने भी निजी और पारिवारिक कारणों का हवाला देकर ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दिया था। उन्होंने यह जिम्मेदारी इस सोच के साथ स्वीकार की थी कि यह दो-तीन महीने की अस्थायी जिम्मेदारी होगी। हालांकि, लंबित मामलों की बड़ी संख्या के चलते उन्होंने बाद में पद छोड़ने का फैसला किया। 91 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटे चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में मार्च में पश्चिम बंगाल के लिए 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए थे। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख नाम हटाए गए। इसके पीछे कई कारण बताए गए, जिनमें “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसीज” भी शामिल हैं। जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उनमें से लाखों ने ट्रिब्यूनल में अपील की है। इन अपीलों पर ट्रिब्यूनल सुनवाई कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि ट्रिब्यूनल के लिए उपलब्ध सुविधाओं और बुनियादी ढांचे में सुधार जरूरी है। इससे मामलों की सुनवाई ज्यादा प्रभावी ढंग से हो सकेगी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)