चुनाव आयोग अधिकारी पर बिना चर्चा फैसले लेने का आरोप:संधू-जोशी ने कैबिनेट सचिव से शिकायत की थी, कार्रवाई नहीं हुई

Oct 23, 2026 - 08:00
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चुनाव आयोग अधिकारी पर बिना चर्चा फैसले लेने का आरोप:संधू-जोशी ने कैबिनेट सचिव से शिकायत की थी, कार्रवाई नहीं हुई
चुनाव आयोग के भीतर अधिकारियों के कामकाज और मतदाता सूची के IT सिस्टम पर नियंत्रण को लेकर विवाद की नई जानकारी सामने आई है। RTI से मिले दस्तावेजों के मुताबिक, दो चुनाव आयुक्तों ने वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के खिलाफ बिना चर्चा के फैसले लेने की शिकायत की थी, लेकिन इस पर तुरंत कोई कार्रवाई नहीं हुई। कैबिनेट सचिवालय ने माना कि पूरे आयोग की आधिकारिक शिकायत के बिना कार्रवाई करना संवैधानिक संस्था के काम में दखल माना जा सकता है। RTI कार्यकर्ता और रिटायर्ड कमोडोर लोकेश के. बत्रा को मिले जवाब से यह जानकारी सामने आई है। गर्ग को 2 सितंबर 2024 को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) के जरिए चुनाव आयोग में तैनात किया गया था। इस पूरे मामले को 6 पॉइंट्स में समझें किसने शिकायत की: चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 29 जुलाई 2026 को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखे। किसके खिलाफ थी: वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के खिलाफ। विवाद की वजह: दोनों आयुक्तों का आरोप था कि मनीष गर्ग ने वरिष्ठ अधिकारियों के बीच काम का बंटवारा बदलने का आदेश आयोग या संबंधित अधिकारियों से चर्चा किए बिना जारी किया गया। वोटर डेटा पर कंट्रोल का मुद्दा: रिपोर्टों के मुताबिक, बदलावों से मतदाता सूची के आईटी सिस्टम की निगरानी और कामकाज के केंद्रीकरण को लेकर चिंता पैदा हुई थी। कैबिनेट सचिवालय ने क्या किया: 3 अगस्त की फाइल नोटिंग में कहा गया कि शिकायतें आयुक्तों ने व्यक्तिगत रूप से भेजी थीं। पूरे चुनाव आयोग की ओर से औपचारिक पत्र नहीं होने पर कार्रवाई अनुचित मानी जा सकती है और इसे संवैधानिक संस्था के कामकाज में हस्तक्षेप समझा जा सकता है। क्या कार्रवाई हुई: शिकायतों पर कोई तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। दोनों आयुक्तों को लेटर मिलने की सूचना दी गई और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यालय को भी इसकी कॉपी भेजी गई। चुनाव आयोग अगले दिन आदेश पलट दिया: शिकायत के अगले ही दिन आदेश पलट दिया गया था। 30 जुलाई को दोनों चुनाव आयुक्तों ने मनीष गर्ग के काम के बंटवारे वाले आदेश को रद्द कर दिया और पुराने इंतजाम को जारी रखने को कहा, जब तक आयोग किसी बदलाव पर सहमति नहीं बना लेता। रिपोर्ट- दो चुनाव आयुक्त ने 14 बार आपत्ति जताई थी 25 सितंबर: इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताई थी। इसमें मतदाता सूची के डेटा पर नियंत्रण और अधिकारियों को जानकारी नहीं दिए जाने के मुद्दे भी शामिल थे। 26 सितंबर: चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि मनीष गर्ग के काम के बंटवारे संबंधी आदेश लागू नहीं किए गए थे और IT विभाग की निगरानी वास्तव में नहीं हटाई गई थी। 3 अक्टूबर: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस अधिकारी की भूमिका और आयोग के IT सिस्टम से जुड़े कामकाज पर सवाल उठाए थे। 21 अक्टूबर: इंडिया टुडे ने RTI के जवाब के आधार पर बताया कि दोनों आयुक्तों के पत्र कैबिनेट सचिवालय पहुंचे थे और आगे संबंधित अधिकारियों को भेजे गए। हालांकि, उस रिपोर्ट में पत्रों की पूरी सामग्री उपलब्ध नहीं थी।

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