सुप्रीम कोर्ट बोला- गलत नंबर डायल कर रहे, प्रदर्शन करें:लोकसभा-राज्यसभा की आरक्षित सीटों के रोटेशन वाली याचिका पर दखल से इनकार

Nov 04, 2026 - 18:50
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सुप्रीम कोर्ट बोला- गलत नंबर डायल कर रहे, प्रदर्शन करें:लोकसभा-राज्यसभा की आरक्षित सीटों के रोटेशन वाली याचिका पर दखल से इनकार
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आरक्षित सीटों के रोटेशन की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई। CJI सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह कोर्ट के बजाय प्रदर्शन क्यों नहीं कर रहा। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा, “आप गलत नंबर डायल कर रहे हैं। यह प्रदर्शन और आंदोलन का दौर है। शायद आपको भी ऐसा ही करना चाहिए।” याचिका में संसद और राज्य विधानसभाओं की अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों का अनिवार्य रोटेशन लागू करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उनका प्रदर्शन करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि उनका गला खराब है। जगदीश सिंह उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की 191-कादीपुर विधानसभा सीट के मतदाता हैं। उन्होंने इस सीट के 1952 के पहले चुनाव से लगातार SC के लिए आरक्षित रहने को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि इससे सिर्फ चार या पांच परिवारों को फायदा हुआ है। उन्होंने कम से कम अधिकारियों को विधानसभा सीटों के आरक्षण में रोटेशन लागू करने पर विचार करने का निर्देश देने की मांग की। पंचायत और नगर निकाय चुनावों में आरक्षित सीटों के लिए रोटेशन की व्यवस्था पहले से लागू है। याचिकाकर्ता ने विधानसभा सीटों के लिए भी ऐसी व्यवस्था लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि रोटेशन की व्यवस्था नहीं होने से संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 19 का उल्लंघन होता है। इससे मतदाताओं के चुनाव विकल्प सीमित होते हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक, मतदाता केवल SC समुदाय के उम्मीदवारों में से ही चुनाव कर सकते हैं। इसी आधार पर उन्होंने आरक्षित सीटों के मौजूदा प्रावधान को चुनौती दी। जाति के आधार पर वोटिंग मानने से इनकार CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि मतदान को जाति के आधार पर होने वाला मान लेना सही नहीं है। जस्टिस बागची ने कहा, “यह तर्क इस धारणा पर आधारित है कि बहुसंख्यक समुदाय जाति या समुदाय के आधार पर वोट करेगा। यह जरूरी नहीं है।” उन्होंने कहा कि कोर्ट लोकतांत्रिक फैसलों पर न्यायिक घोषणा नहीं कर सकता। यह फैसला मतदाताओं को करना है। जस्टिस बागची ने कहा कि किसी सीट के आरक्षित होने से किसी व्यक्ति का वोट देने का अधिकार प्रभावित नहीं होता। उन्होंने कहा, “आपका वोट देने का अधिकार बना रहता है। आप किसी भी समुदाय के उम्मीदवार को वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं।” उन्होंने आगे कहा, “यह कहना कि आप अपने समुदाय के उम्मीदवार को वोट नहीं दे सकते, वैध तर्क नहीं माना जा सकता।” जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि चुनाव लड़ने का अधिकार केवल एक सीट तक सीमित नहीं है। कोई व्यक्ति दूसरी गैर-आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ सकता है। धर्म और जाति के आधार पर वोट नहीं जस्टिस बागची ने कहा कि बहुदलीय लोकतंत्र में मतदाताओं से राजनीतिक दलों और उनकी विचारधारा के आधार पर वोट देने की उम्मीद की जाती है। उन्होंने कहा, “मतदाताओं से पार्टी और उसकी विचारधारा के लिए वोट करने की उम्मीद होती है, धर्म के आधार पर नहीं।” उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति किसी विचारधारा का समर्थन या विरोध कर सकता है। उस विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति की पहचान अहम नहीं रह जाती। सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षित सीटों के लिए रोटेशन सिस्टम लागू करने की मांग वाली याचिका में दखल देने से इनकार कर दिया। बेंच ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 332 SC और ST के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है। किन सीटों को आरक्षित किया जाएगा, यह अलग विषय है। कोर्ट ने कहा कि किसी सीट को आरक्षित करने के लिए अपनाए गए मानदंड से असहमति होने भर से पूरी प्रक्रिया असंवैधानिक नहीं हो जाती। कोर्ट की भूमिका यह देखना है कि प्रक्रिया में कोई साफ या स्पष्ट मनमानी हुई है या नहीं। जस्टिस बागची ने कहा कि लंबे समय तक आरक्षण से समाज में जाति आधारित विभाजन की भावना बढ़ती है या नहीं, इसका आकलन विधायिका को करना है। उन्होंने कहा कि केवल इस आधार पर किसी मौजूदा कानून को असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता। कोर्ट बोला- संविधान को दोबारा नहीं लिख सकते याचिकाकर्ता के वकील ने संविधान के अनुच्छेद 243D और 243T का हवाला दिया। इन अनुच्छेदों में पंचायतों और नगर निकायों में आरक्षण और रोटेशन का प्रावधान है। जस्टिस बागची ने कहा कि संविधान में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अलग व्यवस्था है। कोर्ट संवैधानिक प्रावधानों को दोबारा नहीं लिख सकता। जब वकील ने विधानसभा सीटों पर भी रोटेशन व्यवस्था लागू करने के लिए कानून की अलग व्याख्या करने की मांग की, तो जस्टिस बागची ने कहा, “हम संसद के तीसरे सदन की भूमिका नहीं निभा सकते।” इसके बाद CJI सूर्यकांत ने फिर कहा, “आप गलत नंबर डायल कर रहे हैं। यह प्रदर्शन और आंदोलन का दौर है। शायद आपको भी ऐसा ही करना चाहिए।” वकील ने माफी मांगते हुए कहा कि उनका प्रदर्शन करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका गला खराब है। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, “आप निश्चित तौर पर आवाज उठा सकते हैं और कह सकते हैं कि संसद के लिए इस मुद्दे पर फिर से विचार करने का समय आ गया है। लेकिन यह फैसला केवल विधायिका ही कर सकती है।”

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