बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खतरे में!

दो माह बाद सभी सदनों में शून्य हो जाएगी पार्टी की हिस्सेदारी

Sep 23, 2026 - 01:50
0 0
बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खतरे में!

बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खतरे में!

-दो माह बाद सभी सदनों में शून्य हो जाएगी पार्टी की हिस्सेदारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में दलित-पिछड़ों के वोटबैंक के जरिए अपनी राजनीतिक धमक जमाने वाली बसपा के लिए आने वाले दिन कड़ी चुनौतियों से भरे होंगे। बीते चुनावों में लगातार जनाधार खो रही बसपा का प्रतिनिधित्व दो माह बाद सभी सदनों में शून्य हो जाएगा। बसपा का वर्तमान में केवल राज्यसभा में प्रतिनिधित्व बचा है। बसपा के राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल नवंबर माह में पूरा हो जाएगा। प्रदेश में बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह को बीते माह पांच अगस्त को स्वर्गवास हो गया था। वहीं बसपा के विधान परिषद सदस्य भीमराव अंबेडकर का कार्यकाल भी लगभग दो वर्ष पहले पूरा हो गया था।

उत्तर प्रदेश में भाजपा के हरदीप सिंह पूरी, अरुण सिंह, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, नीरज शेखर, बृजलाल, सीमा, बी.एल. वर्मा और दिनेश शर्मा का कार्यकाल पूरा होने से 8 सीटें खाली हो जाएंगी। इसके अलावा समाजवादी पार्ट के रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल पूरा होने से 2 सीटें खाली होंगी। इस तरह कुल 10 सीटों पर चुनाव होने हैं। प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 37 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होती है, लेकिन बसपा के पास एक भी विधायक नहीं है।

संसदीय इतिहास में पहली बार

चुनाव आयोग ने 16 अक्टूबर को मतदान की तारीख रखी है और इसके नतीजों के आते ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी का वजूद संख्याबल में शून्य हो जाएगा। ये उत्तर प्रदेश के संसदीय इतिहास में पहली बार होगा जब बसपा का लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद में एक भी सदस्य नहीं होगा। बसपा अपनी स्थापना के बाद से पहली बार ऐसा दिन देखने जा रही है जब प्रदेश की राजनीति में वो किसी भी सदन का हिस्सा नहीं रहेगी। हालांकि, वर्तमान में बसपा के रामजी गौतम किसी भी सदन में अकेले प्रतिनिधि हैं और उनका कार्यकाल 25 नवंबर 2026 में पूरा होने जा रहा है।

बसपा का संकट भरा सियासी सफर

बीते करीब डेढ़ दशक से बसपा का सियासी सफर संकट भरा रहा है। वर्ष 2019 में बसपा के 10 प्रत्याशी लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने थे हालांकि तब बसपा ने सपा के साथ गठबंधन किया था। इसके बाद वर्ष 2022 के चुनाव में बसपा के उमाशंकर सिंह बलिया की रसड़ा सीट से जीत हासिल कर पाए थे। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा का खाता भी नहीं खुला था। चुनाव दर चुनाव बसपा का वोट प्रतिशत भी घटने से पार्टी को दोहरे संकट का सामना करना पड़ रहा है।

1997 में मिला था राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा

राज्यसभा चुनाव के बाद बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा फिर खतरे में पड़ जाएगा। बसपा की स्थापना वर्ष 1984 में कांशीराम ने की थी। पार्टी को वर्ष 1997 में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला था। हालांकि चुनाव आयोग ने पिछले साल बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बरकरार रखा था। अब अगले वर्ष होने वाले यूपी समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव बसपा के राष्ट्रीय पार्टी होने का भविष्य तय कर सकते हैं।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User