लाखों खर्च, फिर भी प्यासे लोग; एक साल में दम तोड़ गए वाटर कूलर*

सिधौली में करीब 30 लाख रुपये से लगाए गए एक दर्जन वाटर कूलरों में अधिकांश खराब होने का दावा, कहीं वायरिंग खराब तो कहीं टोंटियां गायब

Oct 10, 2026 - 18:17
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लाखों खर्च, फिर भी प्यासे लोग; एक साल में दम तोड़ गए वाटर कूलर*

*लाखों खर्च, फिर भी प्यासे लोग; एक साल में दम तोड़ गए वाटर कूलर*

गुरप्रीत सिंह सिधौली 

*सिधौली में करीब 30 लाख रुपये से लगाए गए एक दर्जन वाटर कूलरों में अधिकांश खराब होने का दावा, कहीं वायरिंग खराब तो कहीं टोंटियां गायब*

*सिधौली/सीतापुर।* आदर्श नगर पंचायत सिधौली की पेयजल व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। आमजन को शुद्ध और ठंडा पानी उपलब्ध कराने के लिए करीब डेढ़ साल पहले सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए वाटर कूलर बदहाली का शिकार हैं। कहीं वायरिंग खराब है तो कहीं टोंटियां गायब हैं। कुछ स्थानों पर मोटर खराब होने से पानी की आपूर्ति ठप है। ऐसे में तहसील और कोतवाली आने वाले लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार नगर पंचायत क्षेत्र में लगभग एक दर्जन बड़े वाटर कूलर लगाए गए थे। प्रत्येक वाटर कूलर की लागत करीब ढाई लाख रुपये बताई जा रही है। इस हिसाब से परियोजना पर लगभग 30 लाख रुपये खर्च हुए। इसके बावजूद अधिकांश वाटर कूलरों के खराब पड़े होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

तहसील परिसर में लगे दो वाटर कूलर खराब बताए जा रहे हैं। कोतवाली के सामने लगे वाटर कूलर की टोंटी टूटी हुई है, जबकि लेखपाल कार्यालय में लगे वाटर कूलर में खराबी के साथ करंट उतरने की शिकायत भी है। सिटी हॉस्पिटल के सामने लगे वाटर कूलर की हालत भी खराब बताई जा रही है। टंकी रोड के किनारे पड़ी होने और बोरिंग टूटने की बात सामने आई है।

तहसील में प्रतिदिन सैकड़ों लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। इनमें फरियादियों के साथ अधिवक्ता और अन्य लोग भी शामिल होते हैं। वहीं, कोतवाली में शिकायत लेकर आने वाले लोगों को भी पेयजल के लिए परेशान होना पड़ता है। सार्वजनिक स्थानों पर पानी की सुविधा बंद होने से लोगों को दुकानों से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है।

*ईओ ने स्वीकार की खराबी, जल्द मरम्मत का भरोसा*

अधिशासी अधिकारी रेणुका यादव ने बताया कि नगर पंचायत में एक हजार लीटर क्षमता वाले लगभग एक दर्जन वाटर कूलर लगाए गए थे। एक वाटर कूलर की लागत करीब ढाई लाख रुपये थी। उन्होंने बताया कि कई वाटर कूलरों के खराब होने की जानकारी मिली है। तहसीलदार आवास और कोतवाली के सामने लगे वाटर कूलरों में करंट उतरने की वजह से उन्हें बंद कराया गया है। तहसील परिसर में ग्राम न्यायालय के तहत इंटरलॉकिंग का कार्य होने के कारण भी कुछ वाटर कूलर बंद हैं। कहीं मोटर तो कहीं वायरिंग खराब होने की समस्या है। जांच कराकर खराबियों को जल्द ठीक कराने की बात भी उन्होंने कही।

अब सवाल यह है कि लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए वाटर कूलर इतनी जल्दी खराब कैसे हो गए? क्या स्थापना के समय गुणवत्ता की जांच हुई थी और नियमित रखरखाव की व्यवस्था की गई थी? गर्मी में लोगों को राहत देने के लिए लगाए गए ये वाटर कूलर खुद बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। जरूरत है कि नगर पंचायत सभी वाटर कूलरों की जांच कराकर उन्हें जल्द चालू कराए और जिम्मेदारी तय करे।

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