फ्लाइट टिकट 700% बढ़ाने के दावे वाली याचिका खारिज:सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा- फ्लाइट से यात्रा मत करिए, आगे बढ़िए
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बढ़ते हवाई किराए को लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता के 700% तक किराया बढ़ने के दावे पर कोर्ट ने कहा, 'आप हवाई यात्रा मत करिए। आगे बढ़िए।' जस्टिस जे. विक्रम नाथ की बेंच के सामने वकील ने दलील दी कि विमान का किराया 700% तक बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि हवाई यात्रा जरूरी सेवा है और किराए में इतनी ज्यादा बढ़ोतरी संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों पर सुनवाई नहीं की और याचिका खारिज कर दी। हवाई किराए में बढ़ोतरी का पूरा मामला, 10 पॉइंट में समझिए 1. 2025 में उठा था मुद्दा: हवाई किराए में बढ़ोतरी का मुद्दा 2025 में चर्चा में आया। महाकुंभ और पहलगाम आतंकी हमले के बाद कई हवाई रूटों पर टिकटों के दाम अचानक कई गुना बढ़ गए। इसके बाद एयरलाइंस की किराया नीति पर सवाल उठने लगे। 2. यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाने का आरोप: सवाल उठाया गया कि महाकुंभ, त्योहारों, प्राकृतिक आपदाओं और आपात स्थितियों में जब यात्रियों को हवाई सफर करना जरूरी होता है, तब एयरलाइंस किराया कई गुना क्यों बढ़ा देती हैं? 3. 2025 में सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल: इस मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। इसमें हवाई किराए को नियंत्रित करने के लिए स्वतंत्र नियामक बनाने की मांग की गई। 4. डायनेमिक प्राइसिंग पर सवाल: याचिका में आरोप लगाया गया कि एयरलाइंस डिमांड के आधार पर डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम अपनाती हैं। इसके चलते कुछ ही घंटों में टिकटों के दाम कई गुना बढ़ जाते हैं। 5. बैगेज और अतिरिक्त फीस का मुद्दा: याचिका में इकोनॉमी क्लास में मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा 25 किलो से घटाकर 15 किलो करने और यात्रियों से अलग-अलग अतिरिक्त शुल्क वसूलने पर भी सवाल उठाए गए। 6. 17 नवंबर 2025 को कोर्ट ने मांगा जवाब: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, DGCA और एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी से याचिका पर जवाब मांगा। 7. जनवरी 2026 में कोर्ट ने जताई चिंता: महाकुंभ के दौरान हवाई किराए में हुई बढ़ोतरी पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई और इसे यात्रियों का शोषण बताया। 8. सरकार ने नए नियम बनाने की जानकारी दी: अप्रैल से अक्टूबर 2026 के बीच मामले में कई सुनवाई हुईं। केंद्र सरकार ने बताया कि हवाई किराए और अतिरिक्त शुल्क को लेकर नए नियम तैयार किए जा रहे हैं। 9. एयरलाइंस को किराया तय करने की छूट: 20 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने कहा कि एयरलाइंस मांग और सीटों की उपलब्धता के आधार पर किराया तय कर सकेंगी। सरकार सीधे किराए को नियंत्रित नहीं करेगी, लेकिन आपात स्थिति में यात्रियों को महंगे टिकटों से बचाने के लिए किराया तय कर सकेगी। 10. 1 जनवरी 2027 से एयरलाइंस को किराए तय करने की छूट: 16 अक्टूबर को सरकार ने इन्हें अंतिम रूप देकर दो सप्ताह में प्रकाशित करने की बात कही। इसको लेकर 2 नवंबर को गजट जारी कर 1 जनवरी से एयरलाइंस को किराए तय करने की छूट दी। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 16 नवंबर तय हुई थी। एयरलाइंस को सरकार से परमिशन की जरूरत नहीं केंद्र सरकार ने सोमवार को भारतीय वायुयान नियम, 2026 का गजट जारी किया है। नए नियमों के तहत विमानन कंपनियों को हवाई टिकटों का किराया तय करने की छूट दी गई है। एयरलाइंस को किराया बढ़ाने या घटाने के लिए सरकार से पहले अनुमति नहीं लेनी होगी। हालांकि, किसी अपरिहार्य स्थिति में सरकार विमानन कंपनियों को किराए को लेकर निर्देश दे सकती है। ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। त्योहारों में महंगे हुए फ्लाइट के टिकट हवाई ईंधन की बढ़ती कीमतों और कम उड़ानों के कारण त्योहारी सीजन में एयरलाइंस किराए पिछले साल से काफी बढ़ गए हैं। विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि एटीएफ की कीमतें बढ़ने से किराए नियंत्रित रखना चुनौती बन गई है। सरकार इस संबंध में एयरलाइंस और तेल कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है। कुछ दिनों पहले एअर इंडिया और इंडिगो ने किराया बढ़ाया था एअर इंडिया और इंडिगो ने कुछ दिन पहले ही एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल महंगा होने की वजह से किराया बढ़ाया था। एअर इंडिया ने 9 अक्टूबर से घरेलू उड़ानों में 1200 रुपए तक और इंटरनेशनल उड़ानों में 17,800 रुपए तक एक्स्ट्रा फ्यूल चार्ज लगाने का ऐलान किया था। नए फ्यूल चार्ज एयर इंडिया एक्सप्रेस पर भी लागू हैं, क्योंकि दोनों टाटा ग्रुप की एयरलाइन हैं।
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