धीरेंद्र शास्त्री बोले-हमारे राम सीधे, कृष्ण तीन जगह से टेढ़े:पर्वत उठाना बड़ी बात नहीं, हमारे भगवान के चेले ने पूरा पर्वत उड़ा दिया

Nov 02, 2026 - 15:17
Updated: 1 hour ago
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धीरेंद्र शास्त्री बोले-हमारे राम सीधे, कृष्ण तीन जगह से टेढ़े:पर्वत उठाना बड़ी बात नहीं, हमारे भगवान के चेले ने पूरा पर्वत उड़ा दिया

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भगवान श्रीकृष्ण पर टिप्पणी करके विवादों में आ गए हैं। उन्होंने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए कहा- 'तुम अपने वाले ठाकुर जी की एक भी फोटो देख लो। खड़े भी होते हैं तो तीन जगह से टेढ़े। पांव के ऊपर पांव, कमर कहीं लचकाएं और टेढ़ी गर्दन करके बंसी बजाते हैं। हमारे वाले तो खड़े भी होते हैं एकदम सीधे। हमारे वाले का नाम भी सीधा। हमारे वाले का चलना भी सीधा, हमारे वाले दिखते भी सीधे। तुम्हारे वालों का नाम भी टेढ़ा, चलते भी टेढ़े, खड़े भी टेढ़े होते हैं। पर्वत उठाना बड़ी बात नहीं, हमारे भगवान के चेले ने पूरा पर्वत उड़ा दिया था। हमारे वालों का धाम भी सीधा- अयोध्या, तुम्हारे वाले का- वृंदावन!' धीरेंद्र शास्त्री ने यह टिप्पणी मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में चल रही श्रीराम कथा के दौरान की। रविवार को वीडियो सामने आने के बाद मथुरा के साधु-संतों ने नाराजगी जताई। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री से माफी मांगने को कहा है। हालांकि, इस मामले में धीरेंद्र शास्त्री की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है। 'बंसी बजाना खेल, धनुष चलाना खेल नहीं' धीरेंद्र शास्त्री ने बंसी बजाने और धनुष चलाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा- बंसी बजाना तो खेल भी है, धनुष चलाना खेल नहीं। जितने ठाकुर जी वाले बैठे हैं, आज तो तुम्हारे ठाकुर जी की भी जय-जयकार हो रही है। फिर उन्होंने बंसी बजा रहे कलाकार की ओर इशारा करते हुए कहा- सुनो, तुम्हारे ठाकुर जी क्या करते हैं? बंसी बजाते हैं? तो बंसी बजाना कोई बड़ी बात थोड़ी है। देखो, हमारे यहां तो ये भी बजा रहा है। बजा-बजा, बजा। लो, लो। इसके बाद बांसुरी वादक ने कुछ देर तक बंसी की धुन सुनाई। धीरेंद्र शास्त्री ने कथा में बैठे लोगों से पूछा- रामजी को मानने वाले कितने लोग बैठे हैं, हाथ उठाओ। हां! आज तुम लोग फूले नहीं समाओगे। ‘गाय चराना खेल, बंदरों को नचाना खेल नहीं’ धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान कृष्ण के गाय चराने और पर्वत उठाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोग कहेंगे कि हमारे वाले भगवान तो गाय चराते हैं। गाय तो कोई भी चरा सकता है। गाय चराना तो खेल भी है, बंदरों को नचाना खेल नहीं। इसके बाद उन्होंने भगवान कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने का जिक्र करते हुए कहा- तुम कहोगे कि हमारे वाले तो पर्वत उठा लेते हैं, ये कोई बड़ी बात है क्या? हमारे वाले भगवान के चेले ने तो पूरा पर्वत ही उड़ा दिया। यहां उनका इशारा भगवान राम के भक्त हनुमान की ओर था। बयान के आखिर में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- इसका मतलब यह नहीं है कि हम ठाकुर जी के विरोधी हैं। मथुरा के संतों में गुस्सा, पढ़िए किसने क्या कहा- दिनेश फलाहारी बोले- रावण का भी अहंकार नहीं रहा मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर-मस्जिद प्रकरण में याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राम ब्रह्म हैं और श्रीकृष्ण योगेश्वर हैं। उन्होंने कहा, “हमारे कृष्ण कन्हैया ब्रजवासियों के लाडले हैं। उनके बारे में टिप्पणी करना अनुचित है। चाहे धीरेंद्र शास्त्री हों या कोई और, ब्रजवासी उन्हें माफ नहीं करेंगे। रावण का भी अहंकार नहीं रहा, फिर आप क्या चीज हैं?” साध्वी बोलीं- कृष्ण हर ब्रजवासी के लाडले, माफी मांगें साध्वी इंदुलेखा ने कहा कि श्रीकृष्ण आराध्य हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने जिस तरह की टिप्पणी की है, उसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कृष्ण हर ब्रजवासी के लाडले हैं। इसलिए धीरेंद्र शास्त्री को अपनी टिप्पणी पर माफी मांगनी चाहिए ‘बागेश्वर सरकार माफी मांगें, वरना हम चुप नहीं बैठेंगे’ पंडित राजेश पाठक ने कहा कि श्रीकृष्ण के बारे में मजाक में भी कोई गलत टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इतिहास गवाह है कि जब भी किसी साधु-संत या कथावाचक ने श्रीकृष्ण के बारे में अनुचित टिप्पणी की है, ब्रजवासियों ने उसका विरोध किया है। बागेश्वर सरकार की टिप्पणी का भी कड़ा विरोध किया जाएगा। अगर उन्होंने माफी नहीं मांगी तो ब्रजवासी चुप नहीं बैठेंगे। 2 साल पहले पंडित प्रदीप मिश्रा ने की थी टिप्प्णी, रगड़ी थी नाक इससे पहले कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने 9 जून 2024 को ओंकारेश्वर में राधा रानी को लेकर विवादित बयान दिया था। कहा था- राधा रानी का नाम भगवान श्रीकृष्ण की 108 पटरानियों और 1600 रानियों में नहीं है। राधा के पति का नाम अनय घोष, सास का नाम जटिला और ननद का नाम कुटिला था। राधा जी का विवाह छाता में हुआ था। उन्होंने यह भी कहा था कि राधा जी बरसाना की नहीं, बल्कि रावल की रहने वाली थीं। बरसाना में उनके पिता की कचहरी थी, जहां वह साल में एक बार आती थीं। प्रदीप मिश्रा का प्रवचन वायरल होने के बाद संतों और ब्रज के लोगों ने विरोध किया था। सबसे तीखी प्रतिक्रिया प्रेमानंद महाराज की ओर से आई थी। उन्होंने कहा था- लाडली जी के बारे में तुम्हें पता ही क्या है? तुम जानते ही क्या हो? अगर तुम किसी संत के चरण रज का पान करके बात करते तो तुम्हारे मुख से कभी ऐसी वाणी नहीं निकलती। विवाद बढ़ने के बाद 29 जून 2024 को प्रदीप मिश्रा बरसाना मंदिर पहुंचे थे। राधा रानी के जन्म और विवाह को लेकर दिए गए बयान पर उन्होंने मंदिर में नाक रगड़कर माफी मांगी और दंडवत प्रणाम किया था। ……………. ये खबर भी पढ़िए- बरसाना मंदिर में पं. प्रदीप मिश्रा से बदसलूकी, धक्का-मुक्की:नाक रगड़ने के लिए मजबूर किया; लोग राधा-रानी के विवाह पर बयान देने से नाराज थे कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा से शनिवार, 29 जून को बरसाना मंदिर में बदसलूकी की गई। धक्का-मुक्की करते हुए उनके अंगवस्त्र खींचे गए। नाक रगड़ने के लिए मजबूर किया गया। लोग चिल्ला रहे थे कि नाक रगड़वाओ, कान पकड़वाओ...। प्रदीप मिश्रा दोपहर को बरसाना पहुंचे थे। उन्होंने राधा-रानी के जन्म और विवाह से जुड़े अपने बयान पर माफी मांगी। मंदिर में उन पर इस बात के लिए दबाव बनाया गया कि नाक रगड़कर माफी मांगी जाए। इस घटनाक्रम के दौरान पंडित मिश्रा असहज दिखे। पढ़ें पूरी खबर

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