सुप्रीम कोर्ट बोला- बच्चों को इंटरनेट से दूर रखना बेतुका:उन्हें भी इस्तेमाल का अधिकार; बैन लगाना ऑनलाइन सुरक्षा का सही तरीका नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना ऑनलाइन सुरक्षा का सही तरीका नहीं है। बच्चों को इंटरनेट इस्तेमाल करने का अधिकार है, इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए ऐसे उपाय किए जाने चाहिए, जिनसे वे ऑनलाइन खतरों से बच सकें और इंटरनेट का इस्तेमाल भी कर सकें। कोर्ट ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को पहचानने और हटाने के लिए सख्त व्यवस्था बनाने पर जोर दिया। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी चंद्रन की बेंच ने केंद्र सरकार को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट का राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे कंटेंट की जानकारी पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल को देने और शिकायतों पर समयसीमा में कार्रवाई करने को कहा है। केंद्र सरकार को 10 दिसंबर 2026 तक अगली सुनवाई में इन निर्देशों पर हुई कार्रवाई की जानकारी देनी होगी। एक प्लेटफॉर्म से हटने के बाद दूसरे पर दिखता है कंटेंट कोर्ट ने कहा कि फिलहाल एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक कंटेंट हटने के बाद दूसरे प्लेटफॉर्म पर उसकी पहचान अपने आप नहीं हो पाती। इससे वही सामग्री इंटरनेट पर दोबारा फैलती रहती है। इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार को ऐसा डेटाबेस बनाने को कहा गया है, जिसमें कन्फर्म कंटेंट की डिजिटल पहचान और उसके इंटरनेट लिंक दर्ज हों। इसमें असली फोटो या वीडियो नहीं रखे जाएंगे। कंटेंट की पहचान और जांच के लिए बनेगी व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि डेटाबेस में दर्ज हर सामग्री की कई स्तरों पर जांच हो। कम से कम तीन प्रशिक्षित विशेषज्ञ स्वतंत्र रूप से यह तय करेंगे कि सामग्री बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी है या नहीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि गलत पहचान के कारण वैध कंटेंट न हटे, इसके लिए रिकॉर्ड, ऑडिट और शिकायत निवारण की व्यवस्था होनी चाहिए। सोशल मीडिया कंपनियों को 2 घंटे में देनी होगी सूचना कोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे कंटेंट को हटाने के साथ भारतीय कानून के तहत पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल को भी जानकारी देनी होगी। कंपनी अपनी जांच में अज्ञात स्रोत का ऐसा कंटेंट हटाती है, तो उसे दो घंटे के भीतर रिपोर्ट करना होगा। शिकायत के बाद कंटेंट हटाए जाने पर भी शिकायत का निपटारा होने के दो घंटे के भीतर सूचना देनी होगी। बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा की शिक्षा देने पर जोर कोर्ट ने कहा कि तकनीकी उपायों के साथ बच्चों को ऑनलाइन खतरों की पहचान करना और उनकी शिकायत करना भी सिखाना जरूरी है। बच्चों की उम्र के हिसाब से सहमति, सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श, निजी जानकारी की सुरक्षा और ऑनलाइन शोषण जैसे विषयों को पढ़ाई में शामिल करने पर जोर दिया गया है। इसके लिए NCERT और राज्य शैक्षिक संस्थाओं को विशेषज्ञों की मदद से पाठ्य सामग्री तैयार करने की बात कही गई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से नियमों का उल्लंघन करने वाली सोशल मीडिया कंपनियों पर आर्थिक जुर्माना लगाने की व्यवस्था पर विचार करने को भी कहा है। सरकार को 10 दिसंबर 2026 तक अगली सुनवाई में इन निर्देशों को लागू करने की प्रगति बतानी होगी।
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